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होली खेलूंगी उस औघड़ संग जो भस्म से धूसरित हो सर्प का जनेऊ पहन लोटता है मणिकर्णिका घा होली खेलूंगी उस औघड़ संग जो भस्म से धूसरित हो सर्प का जनेऊ पहन लोटता है ...
वो प्रेम ही क्या जो विक्षिप्तता न ला दे वो प्रेम ही क्या जो विक्षिप्तता न ला दे