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Swapnil Ranjan Vaish
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I'm Swapnil Ranjan and I love to read StoryMirror contents.

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Submitted on 09 May, 2021 at 06:19 AM

माँ के चरणों में जन्नत होती है हर किसी को जो नसीब नहीं होती है बिन माँ के कैसा बचपन उम्र वो सिर्फ यूँ ही कटी होती है माँ ने सजाई बचपन की बगिया हर दुख की घड़ी माँ से डरी होती है आँचल की छाव ने ठंडक पहुँचाई दुनिया में अनुभव की धूप जब तेज़ होती है यूँ ही मेरे जीवन को पूरा करती रहना माँ के आशीष से हर कमी दूर होती है

Submitted on 09 May, 2021 at 06:19 AM

माँ का ना कोई सानी दामन में खुशहाली दुआओं की भरी थाली माँ हर सवाल की जवाबी

Submitted on 09 May, 2021 at 06:19 AM

माँ की हँसी गूंजे जिस आँगन वहाँ ना रहता उदास कोई मन वो मुस्कुराये तो हर दर्द मिट जाता उसके आशीष से घर में रहता प्रेम धन


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