Alpi Varshney
Literary Colonel
AUTHOR OF THE YEAR 2021 - NOMINEE

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मित्रांशी सामायिक करा

शब्द बही, यादों के झोके बहुत है अपनापन कुछ मलहम,कुछ अधूरी ख्याईशे बहुत है जब भी लिखने बैठ जाती हूँ बिन कहे अल्फाज तेरे लिख देती हूँ समझ शून्य, सवाल बहुत है!! अल्पी✍️✍️

तुमने मुझसे कुछ कहा नही हम बिन कहे सब कुछ समझ गए चार दिन चार कदम साथ यूँही चलना है तुम्हारे साथ तुम्हारी आँखों में आँखे डालकर सब कुछ हम पढ़ गए!!

किसी की फितरत नही बदल सकते आप कितना भी प्याज को प्यार से काटो आँसू निकलते जरूर है!! अल्पी✍️

कितना आसान होता है साहिब किसी की बेटी पर उंगली उठाना, खुद की बेटी,के बारे में सोचना नाममुमकीं होता है!!✍️✍️✍️

किसी और की बेटी पर बिना सोचे समझे , उंगली उठाना आसान होता है साहिब खुद की बेटी के बारे में सुनना नामुमकिन!!

क्या लिखूं उसकी हकीकत मैं खुद खामोश हूँ!!

क्या लिखूं उसकी हकीकत मैं खुद खामोश हूँ!!

वक्त की मार से ,संभलना सीख गये तेरे बिन रहना सीख गये जब याद आयेंगी ,बता देंगें तस्वीर देख आँसू ,छुपाना सीख गये

दुनिया जो कहे उसे छोड़ो जिसमे आपको खुशी मिले वही करो।


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