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शब्द बही, यादों के झोके बहुत है अपनापन कुछ मलहम,कुछ अधूरी ख्याईशे बहुत है जब भी लिखने बैठ जाती हूँ बिन कहे अल्फाज तेरे लिख देती हूँ समझ शून्य, सवाल बहुत है!! अल्पी✍️✍️
तुमने मुझसे कुछ कहा नही हम बिन कहे सब कुछ समझ गए चार दिन चार कदम साथ यूँही चलना है तुम्हारे साथ तुम्हारी आँखों में आँखे डालकर सब कुछ हम पढ़ गए!!
कितना आसान होता है साहिब किसी की बेटी पर उंगली उठाना, खुद की बेटी,के बारे में सोचना नाममुमकीं होता है!!✍️✍️✍️
किसी और की बेटी पर बिना सोचे समझे , उंगली उठाना आसान होता है साहिब खुद की बेटी के बारे में सुनना नामुमकिन!!
वक्त की मार से ,संभलना सीख गये तेरे बिन रहना सीख गये जब याद आयेंगी ,बता देंगें तस्वीर देख आँसू ,छुपाना सीख गये