I am a teacher and love to write poems.
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तलब उठी खुशियों की , मैं उनके पीछे दौड़ा। न की परवाह रिश्तों की, उनको भी पीछे छोड़ा। न खुशी मिली, न रिश्ते रहे, इस तलब ने कहीं का न छोड़ा।
नेक हो सोच हों बुलंद इरादे कठिनाइयों को धूल चटा दें मिलकर करें काम हम सब तो आसमां को भी जमीं बना दें।