मुझे हिन्दी भाषा में कविताएं और गीत लिखना पसंद है।
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दिन ढ़ल जाता रोज यूँ ही जिंदगी है अनमोल यूँ ही कर्तव्य पथ अब निहार रहा है मुझे प्यार से पुकार रहा है । (विनय अन्थवाल)
जीवन सुखमय कैसे होगा दुर्जनों का ही राज है । सुख की आशा करता रहता संतप्त होता आज है । (विनय अन्थवाल )