स्याही नही दर्द लिखता हूँ... बीते लम्हे और तन्हाई से सीखता हूँ... जमाने के बदलते रंग और वसूल से कुछ खामोश आँखों का मैं दर्द लिखता हूँ..
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अक्सर तेरी यादों को अपने साथ चाय पर बुलाया करता हूं.. आजकल इस तन्हाई में खुद से कुछ इस तरह मुलाक़ात करता हूँ..!