Arun Saini
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रह रहकर दिल उसे याद करता है, एक वीराने से घर को आबाद करता है, कुछ तो बात होगी उसमें, वरना एक बार साथ छूटने पर कौन किसे याद करता है।

उसके ना मिलने का मलाल तो रहेगा, खुदको लाख समझाऊँ मगर उसका ख्याल तो रहेगा, मैं इस जहां में एक शक्श का भी हकदार नहीं था क्या, खुदा से मेरा ये सवाल तो रहेगा।

तुमसे मिलकर तुमहारा ग़म बाँटना चाहता हूँ, भुला दो तुम अपने सब दर्द, मैं वो मरहम बनना चाहता हूँ, बस एक ख्वाहिश है हमारी, तुमहारे लबों पर पहले वाली मुस्कुराहट चाहता हूँ।

इतना दिल क्यों दुखाते हो, एक दर्द भुलाता हूँ, दूसरा दे जाते हो, जो बात हमे पसंद नही, क्यों उसे बार बार दोहराते हो, आपको मालूम है हम मानने वाले नही, फिर क्यों मुझे घड़ी घड़ी आज़माते हो।

वो इश्क़ ही क्या जो भुलाना पड़े, दुनिया के डर से दूर जाना पड़े, आप जाओ चाहे हमे छोड़ कर, हम आज भी है किसी के इंतेज़ार में खड़े।

तेरी मुश्किल ना बढ़ाऊँगा, चला जाऊँगा, आएगी याद तेरी, तो दिल को समझाऊँगा, दुआ है रब से ना मिले तुझे कोई ग़म, अपने अश्को को मैं आँखों में छिपाऊँगा। गर हुआ तुझसे कभी सामना, मुमकिन तो नही, पर फिर भी, तुझसे नज़रे चुराऊंगा और चला जाऊँगा।

कर रहे हो कोशिश हमे भुलाने की, कभी तो हमारी याद में तुमहारी अँखिया बहेंगी, तुम कहो ना कहो, मैं अब भी तुमहारा हूँ, ये मेरी हर सांस कहेगी, अब हम तुमहारे लिए ज़रूरी ना सही, पर तुमहारी ज़िन्दगी में हमारे बिना कुछ तो कमी रहेगी।

ना हो जिसकी कोई मंज़िल अब मैं वो परिंदा हूँ, थम चुकी होती अब तक ये सांसे बस एक आस पर ज़िंदा हूँ, तेरे बदलने का कोई ग़म नही बस अपने ऐतबार पर शर्मिंदा हूँ।

कितना पागल दिल है, आज भी उनके इश्क़ में चूर है, जाने क्यों लगता है ऐसे, वो मुझसे दूर जाने को मजबूर है, यूँ तो रखता हूँ उनको अपने दिल के क़रीब, पर हर पल लगता है ऐसे, वो मेरे साथ होते हुए भी दूर है।


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