Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021
Literary General
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फिजिसियन

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नया गीत हो नई रागनी , नव जीवन का गान करो ! जो दुबके और पीड़ित हैं , उनसब का उत्थान करो !! @ परिमल

करो तुम बात ही सबसे, उसे अपना बना लो तुम ! करो तुम प्यार की बातें, उसे खुद में छुपा लो तुम !! @ परिमल

नहीं कुछ भी यहाँ सबका, सदा रहता नहीं हर दिन ! करें क्यों हठ किसी से हम, नहीं रहता बराबर दिन !! @ परिमल

यह आकाश आज भला मौन क्यों है ? अनगिनत तारे नभ में जगमगा रहे हैं ! सब अपने में प्रकाश समेट लिया है , अपने घरों में तारे खुशियाँ मना रहे हैं !! @ परिमल

देश के हैं प्राण ,गाँवों में ही बसते , उनकी मेहनत से ,ही हम निखरते ! पहाड़, जंगल ,झील ,झरने हमारे , रक्षाकवच बनकर ,हमारे साथ रहते !! @परिमल

कैसे समझेंगे मित्र आपको ,कभी आपने कुछ बोला नहीं ! व्यर्थ जुड़े हैं फेसबुक में ,कभी आपने संज्ञान लिया नहीं !! @ परिमल

समझे आप महान हैं लेकिन रंगमंच पर फेसबुक मित्र हैं! संवाद आज तक नहीं किया ,आभार से भी हम बँचित हैं!! @ परिमल

जानता हूँ हमारे लिखने से कोई कुछ नहीं बदलता, बस कभी -कभी आईना दिखा देता हूँ !@लक्ष्मण

जब असहिष्णुता सर पे चोट करती है ,मंहगाईयाँ सर चढ़ के जब तांडव मचाती है ,तभी कविता भी द्रवित होकर नयनों से आँसू बहाती है@परिमल


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