एक ऑटो मेकेनिक हूँ, बिगड़ी को बनाना ही मेरा धर्म है, कभी कभी थोड़ा बहुत लिख लेता हूँ!🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏
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मुक़्क़र्र खुद को ही सजा की तुमने, ये कहाँ जायज़ था! आख़िर, हम भी तो गुनहगार थे, तेरे इश्क़ में! " प्रवेश "
कभी जिन्दा थे, तो वो रखते थे, दिल में बसाकर, आज मर गए तो, घर में रखना भी गवाँरा नहीं समझा ! " प्रवेश "