madhu modi
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जिसकी तुम पूजा करते हो मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे में वह तुम ही हो, तुम ही हो सूरज चंदा या तारों में सब प्यास छोड़ पीना सीखो कुछ मस्ती में जीना सीखो......

मंजिल मिले ना मिले इसका गम नहीं मंजिल की जुस्तजू में मेरा कारवां तो है.....

जिंदगी गुजर जाती है यह ढूंढने में की ढूंढना क्या है...... अंत में तलाश सिमट जाती है इस सुकून में की, जो मिला.... वह भी कहां साथ लेकर जाना है। जब भी देखता हूं किसी को हंसते हुए...... तो यकीन आ जाता है.... की खुशियों का ताल्लुक दौलत से नहीं होता.... जिसका मन मस्त है उसके पास समस्त है!!

हे प्रभु! जो कुछ भी हमें मिला वह हमारी पात्रता से कहीं अधिक था और जो कुछ हमें नहीं मिला वह कभी हमारा था ही नहीं.......


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