जब भी कलम चलती हैं, तकदीर भी बदलती हैं ।
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अपने लक्ष्य की पतंग को ऊंचाई तक ले जाए,किंतु अपने लक्ष्य प्राप्ति हेतु किसी और की पतंग ना काटे। मकर सक्रांति की हार्दिक शुभकामनाए सुनिता उपाध्याय
मन कह रहा आज मेरा यादों में उनकी वक्त है ठहरा छूकर देखने को चाहे दिल मेरा लेकिन उनका तो है मेरी यादों में बसेरा