वरिष्ठ अध्यापक (हिन्दी), स्वतंत्र लेखक
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नाम का झाँसा, इनाम का लालच, नोटों की रिश्वत का उपहार, हर दफ़्तर की टेबल के नीचे चलता, बेमानी के शासन का भ्रष्टाचार।
बड़ी देर... हो गई आने में, वक्त गुजर गया, ज़िंदगी बनाने में। उम्र... बचपन ले गई, जवानी, वक्त बहा ले गया, बुढ़ापे ने सारी इच्छाएँ छीन ली, ज़िंदगी किसकी बनी ? बड़ी देर हो गई, यह समझ आने में।