आशा हूँ ,मन के भाव पन्नो पर उकेरती हूँ
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सुनो ओह हो इश्क़ है,किससे कब से,क्यों है,कैसे हुआ,टिकेगा? इन सारे सवालों से बेहतर है मेरा मौन,चलो जाओ ख़बर हम तुमको भी न होने देंगे,तुमसे गले मिलेंगे दोस्तों की तरह,ज़ोर से थपकी भी लगाया करंगे,आँखों से लेंगे हर पल बोसे, तुम्हारी खुशबू हवाओं से #तस्लीम