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गर सब कुछ जान कर निकल पड़ो चाक-चौबारों से अब, तब तुम भी सुभाष हो। गर सब कुछ जान कर निकल पड़ो चाक-चौबारों से अब, तब तुम भी सुभाष हो।
अब ढूंढता हूँ उस खुशी को फेसबुक व्हाट्सप ट्विटरी मोबाईल गलियों में मगर जी ना भरता! अब ढूंढता हूँ उस खुशी को फेसबुक व्हाट्सप ट्विटरी मोबाईल गलियों में मगर जी ना ...
धन्य सृष्टि वर्षा कल्पित प्रसाद.. नितांत एकांत नवनीत मनोरम! धन्य सृष्टि वर्षा कल्पित प्रसाद.. नितांत एकांत नवनीत मनोरम!
खुद के चेतन को जगाता गया मैं एक अविरल अविच्छिन्न प्रकाश सा बन रह गया खुद के चेतन को जगाता गया मैं एक अविरल अविच्छिन्न प्रकाश सा बन रह गया
सुबह के उजाले में छिपता वो कैसा पूंज है। सुबह के उजाले में छिपता वो कैसा पूंज है।
क्योंकि एक आर्ट गैलेरी सी ‘दर्पण’ जो तुम हो। क्योंकि एक आर्ट गैलेरी सी ‘दर्पण’ जो तुम हो।
बन जाता हूँ एक छाया-छत्र को लिए.. छत्रपति। बन जाता हूँ एक छाया-छत्र को लिए.. छत्रपति।
अनुशासक हूँ.. स्वतः स्फूर्त प्रभावों का उपासक हूँ। अनुशासक हूँ.. स्वतः स्फूर्त प्रभावों का उपासक हूँ।
अहा स्वेतलाना, संगमरमरी झुरमुटों में जो छिप सी गई हो.. अहा स्वेतलाना, संगमरमरी झुरमुटों में जो छिप सी गई हो..
माटी की मीत तो बस जाकर उड़ती और जाकर गिरती अपने प्रण कण कण से.. माटी की मीत तो बस जाकर उड़ती और जाकर गिरती अपने प्रण कण कण से..