khud ki koi khwahish nhi zindagi ko khwahishon se azaad rkhna Email:-bhupendraraj153@gmail.com
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जब भी मुलाक़ातों का ज़िक्र होता है किसी से मेरे दिल मे तेरा ही ख्याल आता है और कदम रुक से जाते है दिल कहता है अभी तो दिल की मरम्मत हुई तू फिर से दिल टूटने की राह पे चल निकला है
दिन गुजर कर खत्म हो रहा है रात का सन्नाटा गुजर कर खत्म हो रहा धीरे धीरे उम्र का हर एक पड़ाव खत्म हो रहा बस एक तेरी यादों का सफर नही खत्म हो रहा