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" चलो छोड़ो, रहने दो ये सब निगाहों से निगाहों तक, बस समझ से समझ तक ही वरना मैं इजहार ए इश्क़ करूंगी और तुम्हें फिर फिलाॅसोफी लगेगी। "
मां की ममता नहीं, ममता के लिबासों में , तसल्लियां मिला करती हैं मां चली जाए इक बार , तो फिर दोस्तों तो फिर मां कहां मिला करती है