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बड़ी से बड़ी उलझन एक पुचकार से सुलझा देती है, दर्द में देख माँ नज़रें उतार देती है…!
ऊंच नीच जातिवाद रंगभेद लिंगभेद वाह रे मानव तूने भी जीवन काटने को क्या उपाय किए हैं