तेजी से लोकप्रिय हो रही और धनराज माली 'राही' द्वारा लिखित पुस्तक 'लौट आना मुसाफ़िर' एवं स्टोरीमिरर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कहानी लेखन प्रतियोगिता
लौट आना मुसाफ़िर
प्रतियोगिता हेतु नियम व शर्तें : -
● विषय
'लौट आना मुसाफ़िर' कहानी प्रतियोगिता में कहानी का केंद्र बिंदु मुसाफ़िर, राही, पथिक, यात्री या राहगीर हो। कहानी किसी सफर की, यात्रा की, किसी मुसाफ़िर की, किसी ड्राइवर या आपके सफर पर केंद्रित हो। यह कोई यात्रा संस्मरण भी हो सकता है, किसी रास्ते की कहानी, किसी यात्रा में मिले अनुभव की कहानी या ऐसी कोई कहानी को 'मुसाफ़िर' या उसके पर्यावाची शब्दों पर आधारित हो। कहानी में न्यूनतम 1000 शब्द व अधिकतम 3000 शब्द हो सकते हैं। कहानी की मांग है तो इन शब्दों पर पाबन्दी नहीं है। बस देर किस बात की, उठाइये कलम, मोबाइल, लैपटॉप या अपना कम्प्यूटर और लिखिए एक कहानी जो 'मुसाफ़िर' को उसकी मंज़िल तक पहुँचा देवे।
प्रविष्टि भेजने की समय सीमा 1 अक्टूबर 2020 से 30 अक्टूबर 2020 तक की ही है, इसके बाद भेजी गई प्रविष्टियां स्वीकार्य नहीं होगी।
● इस आयोजन में सिर्फ़ और सिर्फ़ गद्य - लेखन की विधा कहानी - लेखन ही स्वीकार्य हैं। कहानी की शब्द शब्द सीमा कम से कम 1000 और ज्यादा से ज्यादा 3000 होना चाहिए या जितनी कहानी की माँग हो उसके अनुसार लिखी जा सकती है।
● यह प्रतियोगिता हर आयु के रचनाकारों के लिये है। आयुसीमा कोई मायने नहीं रखती।
● आपके द्वारा भेजी गई कहानियाँ मौलिक होनी चाहिए। किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में सारा दायित्व प्रतिभागी का स्वयं होगा।
● प्रतिभागी अपनी नवीनतम फ़ोटो के साथ अपना संक्षिप्त परिचय (व्यवसाय, पत्र व्यवहार का पता व दूरभाषक्रमांक सम्मिलित हो) अपने स्टोरीमिरर की प्रोफाइल में अवश्य अपडेट करें।
● यदि रचना किसी भी दूसरे लेखक की कॉपी की हुई पाई जाती है तो स्टोरीमिरर की वेबसाइट से उसे डीलिट कर दिया जाएगा।
● अपनी रचना में वर्तनी व व्याकरण का विशेष ध्यान रखें। कहानी मौलिक होनी चाहिए, आप किसी अन्य की रचना की नकल नहीं कर सकते।
● एक कहानीकार कितनी भी कहानियाँ प्रेषित कर सकता है।
परिणाम और पुरस्कार
● परिणाम 30 नवंबर 2020 को स्टोरीमिरर वेबसाइट पर घोषित किया जाएगा।
● रचनाओं की गुणवत्ता के आधार पर 5 विजेताओं का चयन किया जायेगा। प्रत्येक विजेता को ₹501 का नक़द पुरस्कार दिया जायेगा।
शब्द सीमा कम से कम 1000 और ज्यादा से ज्यादा 3000 होना चाहिए।
● सभी प्रतिभागियों को स्टोरीमिरर की तरफ़ से 100रूपए का शाप वाउचर और डिजिटल सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।
नोट: रचना केवल प्रतियोगिता के लिंक पर ही जाकर प्रेषित की जानी चाहिए। प्रतियोगिता में भागीदारी पूर्णतः निशुल्क है।
किताब के बारे में -
'लौट आना मुसाफ़िर' सिर्फ एक किताब नहीं है, यह मानवीय मूल्यों का दस्तावेज है। कहानियां सिर्फ कहानियां नहीं है, बल्कि लोगों की जिंदगियां है। कुछ ऐसे सवाल है जिनके जवाब हमेशा अनुत्तरित है। जैसे क्या हम अपने हाथों से अपनी ही बहन-बेटियों का भविष्य अंधकार की भेंट नहीं चढ़ा रहे हैं? हम नादानी में न केवल छोटे-छोटे मासूमों का बचपन भटका रहे हैं, बल्कि युवाओं को मानसिक रूप से पंगु बना रहे हैं। ''लौट आना मुसाफ़िर'' की एक कहानी 'टूटते रिश्ते' ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब तलाश कर रही है। सवाल जो आपको भी हल करने होंगे, आज न सही, आने वाले कल में सही।
उस आँगन के पेड़ पर हमेशा ही चिड़ियाओं की चहचहाहट रहती थी। चिड़िया के सपने बड़े थे, उसे किसी फलदार पेड़ की तलाश थी। एक दिन उसे किसी ने ख्वाब दिखाया कि बड़े शहर में बहुत फलदार पेड़ है। वह उड़ी नहीं, भाग गई। एक दिन वापस लौटी उस पेड़ पर.. नई उम्मीदों, नए सपनों व आँगन में बसी जिंदगियों की चंद साँसे लेकर। ऐसी ही एक कहानी है 'चिड़िया भाग गईं' जो मेरी किताब ''लौट आना मुसाफ़िर'' में पढ़ने को मिलेगी। बस ध्यान रहे, आपकी आँखे नम न हो।
जीवन में सबकुछ खोने के बाद वह गाँव आया। नदी किनारे गाँव के वट वृक्ष के नीचे बैठकर हमेशा वह अपनों को तलाश करता। क्या उसकी तलाश पूरी हुई या वह भी? '' लौट आना मुसाफ़िर'' की 'यह जीवन है' नामक कहानी आपको आज के बुजुर्ज़ों की पीड़ा से रूबरू करवाएगी। ''लौट आना मुसाफ़िर'' को किताब नहीं, आपके आस-पास टहलते पात्रों को ध्यान में रखकर पढ़े।
''लौट आना मुसाफ़िर'' में कहानियां समाज की है, कहानियां दर्द में डूबी है, कहानियां गरीबी की कोख से जन्म लेकर अमीरी के ख्वाब देखती चिड़िया की है, कहानियां समाज के ऐसे खोखले बन्धनों की है कि उसकी जवानी के सपने स्कूल की घण्टी बजाने को बेबस है।
एक पिता की बेबसी का क्या कहा जाए, जो स्कूल के परकोटे से अपने बच्चे को देख तो सकता है, छू नहीं सकता।
राही की कहानी का पात्र गांव के उस नदी किनारे वट वृक्ष की छाँव में बैठकर अपनों की तलाश करता प्रतीत होता है। सपना उस बूढ़े धन्नीलाल का भी है जो वटवृक्ष की छाँव में बैठकर वहाँ की हवा में तैरती अपने पुरखों की आवाज़ सुनने को बेताब है। कहानी उस शख्स की भी है, जो जिंदगी से ज्यादा इस बात से खुश है कि उसकी राख भी उसी हवा में उड़ेगी, जहाँ उसके माता-पिता की चिता जली थी कभी।
समाज में ऐसे कितने धन्नीलाल है जो वक़्त से पहले ही अपनों के द्वारा बूढ़े बना कर धकेल दिए जाते हैं। इसलिए तो शायद वृद्धाश्रम भरे पड़े है। मानवीय मूल्यों व मानवीय पीड़ा को बयान करती यह कहानियां इस किताब को लोकप्रिय बना चुकी है। आपको भी यह किताब जरूर पढ़नी चाहिए।
लेखक के बारे में --
'लौट आना मुसगिर' के लेखक धनराज माली मूल रूप से सिरोही राजस्थान के निवासी है, यह सोशल मीडिया पर अपने नाम के आगे 'राही' लगाते है। धनराज माली 'राही' फेसबुक पर अपने खास अंदाज में किस्सागोई करने केलिए मशहूर है। इन्हें फेसबुक पर फॉलो करने वाले हजारों लोग है, जो इन्हें वर्षों से पढ़ते है। इनका फेसबुक पेज लोकप्रिय पेज है, जिसे 12000 लोग फॉलो करते हैं।
धनराज माली 'राही' कई पत्र-पत्रिकाओं व समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं। इनकी सामाजिक पत्रिका 'माली दर्शन' एक समय सामाजिक पत्रिकाओं में काफी चर्चित थी। वर्तमान में धनराज माली 'राही' कुछ ब्लॉग का संचालन करते हैं। महर्षि दयानन्द सरस्वती यूनिवर्सिटी अजमेर से तृतीय वर्ष स्नातक कर चुके माली पेशे से कम्प्यूटर ग्राफिक्स का काम करते है। यह समाचार पत्र व पत्रिकाओं की डिजायनिंग, कम्पोजिं, टाइपिंग व प्रिंटिंग का काम करते हैं।