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यहां तक कि...

“ यहां तक कि खुद को भुला दिया रिश्ते को निभाने में, पर उन्ही रिश्तो ने कोई कसर न छोड़ी खंजर चुभाने में, सुई धागे की तरह रिश्तो को जोड़ते रहे हम जिंदगी भर, पर अपनों ने ही‌ तो कैंची चला दी रिश्तो के विश्वास पर। मिली साहा ”

By मिली साहा
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