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वक्त ने ...

“ वक्त ने ऐसी चोट दी कि अपनों से ही दूर हो गए हम, हवाओं ने भी कुरेदा है जमकर हमारा हर एक जख़्म, पुरानी यादों की चादर ओढ़कर बस जिये जा रहे हैं, खुशियां अब रास नहीं आती जिंदगी ने दिए इतने ग़म। मिली साहा ”

By मिली साहा
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