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वक्त के साथ...
“
वक्त के साथ आज यहांँ सब कुछ कितना बदल गया है, वो पनघट पे पनिहारिनो का शोर जाने कहांँ खो गया है, पायल की रूनझून आवाज़, मटकियों से झलकता जल, दिखता नहीं अब, मानो सब कहीं बादलों में छुप गया है। मिली साहा
”
By
मिली साहा
1429
वक़्त
पनघट
बादल
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मिली साहा
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