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तू छिप के बैठा...
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तू छिप के...
“
तू छिप के बैठा है कहीं, मुझे भँवरों की तरह तुझे ढूँढने की आदत है... शायद मिल जाए कहीं मेरे दिल का करार, यही सोच गुलज़ार में भटकने की आदत है! स्वरचित@रुचिका
”
By
Ruchika Rana
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दिल का करार
गुलज़ार
आदत
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Ruchika Rana
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