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ठोकरे खाकर...

ठोकरे खाकर संभलना सीखे है हम इसलिए चोट खाकर भी भूल जाते है। अब कोई भी चाहे आजमा ले मेरी कुब्बत, हर तरह के दर्द में लव मुस्कुराते है। #शर्माजी के शब्द

By प्रवीन शर्मा
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