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तपती गर्मी...
“
तपती गर्मी में बहता पसीना, झुलसते चेहरे ए मेरी वादी य कश्मीर कब में आऊं बाहों में तेरे कितने साल भीत गए, ज़ख्मों को यूं संभाले तेरी मिट्टी के लेप से ही भर जाएंगे यह छाले..
”
By
Ratna Kaul Bhardwaj
282
ताप्ती
झुलसते चेहरे
ज़ख्म
दुख के छाले
बाहें
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Ratna Kaul Bhardwaj
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