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स्वयं के अंदर ही...
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स्वयं के...
“
स्वयं के अंदर ही ईश्वर विराजमान है, व्यर्थ ही ढूंढता इधर-उधर इंसान है।। मिली साहा
”
By
मिली साहा
130
प्रेमहिईश्वरहै
इंसानियत
इधर उधर
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