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सब्र मुझमे कितना...
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सब्र मुझमे...
“
सब्र मुझमे कितना है ये तुमको समझाना है पूरी जिंदगी तेरे बिन काट लेना तो बस बहाना है मेरी आँखें लड़कर तुझसे मक्कार हो गई, छलक उठी वरना दिल मे आज भी गहरा समंदर पुराना है #शर्माजी के शब्द
”
By
प्रवीन शर्मा
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शर्माजी के शब्द
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प्रवीन शर्मा
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