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रूह से...

रूह से मिलना है तो ये निमंत्रण ही कैसा , जिस्म को बुला के रुह से मिलने का ये ख्वाब ही कैसा रूह से मुलाकात करनी हैं तो हमको ना बुलाइए अपने दिल के रस्ते हमारे दिल में आकर बैठ जाइए By Satish Chauhan

By Satish Chauhan
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