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"प्रशंसा और...

"प्रशंसा और निंदा, लाभ और हानि, सुख और दुःख, हवा के झोंके की तरह आते जाते रहते हैं... इन सभी में सामंजस्य स्थापित करने के लिए, हमारे भीतर एक वृक्ष की तरह स्थिरता होनी चाहिए..." @सोनाली

By Sonali Tiwari
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