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फरेब ही...

फरेब ही फरेब मिला है पग -पग पर अपनों से, जख्मों से तर-बतर एक जिंदा लाश हो चुका हूं, तदफ़ीन ही बाकी रह गया है बस, इस बुझे जीवन से तो पहले ही विदा हो चुका हूं।। मिली साहा

By मिली साहा
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