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फिर वही ...

फिर वही मासूम बचपन जीना चाहूं मां तेरी उंगली पकड़कर मैं चलना चाहूं मां थक चुका अब संसार की जिम्मेदारी से तेरे आंचल में चैन की नींद सोना चाहूं मां मिली साहा

By मिली साहा
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