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निकला था...

निकला था आसमान की तलाश में जमीं भी छूट गई, बहुत कुछ पाने की चाह में ये जिंदगी भी निकल गई, ख्वाहिशें हजार लेकर दिल में निकला था मैं सफर में, सफर भी पूरा न हो सका ख्वाहिशें भी अधूरी रह गई।। मिली साहा

By मिली साहा
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