STORYMIRROR

मन समंदर...

मन समंदर सोच की ये लहरें जज़्बातों के तूफ़ान में भला अब ये मन कैसे ठहरे ठहराव के उस पल में ज़ख़्म भी कई गहरे तू तो चला गया पार मेरे समंदर के मगर तेरी यादों के निशान अभी भी मुझमें ठहरे

By Gaurav Dhaudiyal
 42


More hindi quote from Gaurav Dhaudiyal
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments
19 Likes   0 Comments
22 Likes   0 Comments
11 Likes   0 Comments