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"मैं शब्दों...

"मैं शब्दों में वह सन्नाटा ढालता हूँ, जो भीड़ में भी अकेला महसूस करता है — और कल्पनाओं से वह संसार रचता हूँ, जहाँ दिल को सुकून मिलता है।"

By Vishrant gupta
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