STORYMIRROR

मैं चाहे...

मैं चाहे कितने ही रंग में बिखरूं, मन्नत तो तेरे रंग की ही की थी। तेरी खुशबू से महका क्यों ना करूँ, मेरी बाहों में तूने सांसे जो ली थी। प्यार किया इसमें गलती कोई नही मेरी, कुंवारे दिल में जगह बस तेरी ही खाली थी। #शर्माजी के शब्द

By प्रवीन शर्मा
 111


More hindi quote from प्रवीन शर्मा
0 Likes   0 Comments
0 Likes   0 Comments