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क्यों देर लगाते...
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क्यों देर...
“
क्यों देर लगाते हो तुम खुद को बदलने में, इदराक है सदैव वक्त के साथ ही चलने में, वक्त ना रुका ना रुकेगा किसी के लिए भी, वक्त बर्बाद ना करो वक्त की गति रोकने में। मिली साहा
”
By
मिली साहा
68
वक़्त
संगति
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