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कर्म प्रधान...

कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करिय सो तस फल चाखा ॥ सकल पदार्थ हैं जग माहीं, कर्महीन नर पावत नाहीं ॥ कर्म की बड़ी महिमा है। बिना कर्म किये कुछ नहीं मिलता। इसलिए ज्ञानी जन कर्म करते रहते हैं ।

By chandraprabha kumar
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