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किया धरा का...

किया धरा का दोहन हमने नही परवाह की तनिक भी। फिर बोलो कैसे ना प्राण वायु को तरसगें हम। नही एक भी सुनी हमने प्रकृति की पुकार को। जब प्राणों पे अपनी बन आई अब सायद हम जागेंगे प्रकृति को बचाने के खातिर सब एक मंच पे आएगे। भावना बर्थवाल

By bhawana Barthwal
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