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कीचड़...

कीचड़ उछालना और मुस्कुराना आसान है बेसिर पैर बातों को हवा देना आसान है कुछ समय सुकून भी दे सकता है मगर खुद का दामन भी नहीं बचा पाओगे कीचड़ में खिला कमल तो नहीं बन पाओगे ख़ुद को अकेला ही पाओगे डॉ लाल थदानी #अल्फ़ाज़_दिल से 26.01.2022

By Dr Lal Thadani
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