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ख़ामोश मेरे...

ख़ामोश मेरे हर लफ्ज़ पर क़ीमती होता हैं। मैं रहूँ ख़ामोश गर बेफ़िक्र ख़ुद का होता हूँ। जिन लफ़्ज़ों को बयां नहीं कर सकता मैं... उन लफ़्ज़ों से ये हार्दिक इत्तफाक होता हैं।

By Hardik Mahajan Hardik
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