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कभी सोच कर...

कभी सोच कर देखना तू मुझे तन्हाई में, देख कैसे ज़िन्दा हूँ मैं तेरी रुसवाई में, मैं परेशान हूँ करके वफ़ाएं तुझसे, तू खुश होके रहना अपनी बेवफ़ाई में।

By GAUTAM RAVINDRA PRATAP
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