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कभी मर्जी...

कभी मर्जी से, कभी लालच से तो कभी मजबूरियों की बलि चढ़कर, अनचाहे ही सही ज़िन्दगी की किताब में कई बार, समझौतों के रूप में ऐसे पन्ने भी जुड़ जाते हैं, जिन्हें हम जोड़ना नहीं चाहते थे.........। अंकिता भदौरिया

By Ankita Bhadouriya
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