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“कभी हर्फ़...

“कभी हर्फ़ ढूंढता हूँ, मिलते नही कभी फ़सानो के अम्बार लग जाते है कभी तो दिया लेकर ढूंढो, अंधेरा नही मिलता कभी मेरे पास बैठा शख़्स पहचान नही पाते है”

By प्रवीन शर्मा
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