STORYMIRROR

ज्यादा...

ज्यादा काबिल बनने की दौड़ में हम खुद को काफी पीछे छोड़ आए। हर कदम पे अपने डर को अपनी जेब में लिए घूमते हैं। कहते हैं कि हौसलों में बुलंदियाँ नहीं होती। कभी तसल्ली से बचपन के रेत के मकानों को सोच लेना। और अगर मन कभी थक जाए तो उस नाँव को ज़रूर सोचना जो आज भी उसी समंदर में मस्ती से झूमती हुई आगे बढ़ रही है जहाँ गहराइयों में डूबने के डर से तुमने कभी मुड़के नहीं देखा।- सिद्धी दिवाकरबाजपेयी

By Siddhi Diwakar Bajpai
 215


More hindi quote from Siddhi Diwakar Bajpai
32 Likes   3 Comments
25 Likes   12 Comments