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जिस्म का हिस्सा...
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जिस्म का...
“
जिस्म का हिस्सा था वो जो कट कर अलग हो गया, मांँ होने का एहसास था जो वो एहसास ही छिन गया, खिलने वाला था एक फूल जिस चमन में वो चमन उजड़ गया, एक नारी का सर्वोत्तम श्रृंगार था जो वो श्रृंगार छिन गया, मिली साहा
”
By
मिली साहा
57
माँ
एहसास
नारी
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मिली साहा
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