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जिन्दा हूँ...

“ जिन्दा हूँ इसका सबब बूझो ना कैसे लगे लब से लब पूछो ना किस्से वो घुलकर उतर गए सांसो में ऐसे पिघला सूरज सांझ में उतरता जैसे शर्माजी के शब्द ”

By प्रवीन शर्मा
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