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"जीवन में...

"जीवन में कितनी विडंबनाएं हैं.. ग़म भी ज़रुरी है खुशियों को समझने के लिए... शोर भी ज़रुरी है ख़ामोशी को महसूस करने के लिए... अनुपस्थिति भी ज़रुरी है मौजूदगी के एहसास के लिए..." @ सोनाली

By Sonali Tiwari
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