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जाने कया ...

जाने कया सोचकर लेहरे साहिल से टकराती हैं और फिर से लौट जाति हैं समज नही आता के वोह किनारे से बेवफ़ाई करती हैं या फ़िर लौट कर समुन्दर से वफा करती हैं ।

By Thakkar Hemakshi
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