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ज़िंदगी...

ज़िंदगी में मोड़ कुछ ऐसा आया ... एक तरफ खुद को और एक तरफ खड़े परिवार को पाया ... ज़िंदगी ठहर सी गई... खुद के वजूद को एक डिब्बी में डाल.. घर के अंधेरे कमरे में रख दी अपने अरमानों की गुल्लक।।।

By Sonias Diary
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