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इसके लिए...

इसके लिए उम्र जात रंग में धरा क्या है प्यार है पगले, पूरा ही होता है जरा क्या है सोचता हूँ सलाम खुदा को करुँ या महबूब को पर दीवानों ने खुदा और खुदाबक्श में फर्क कहाँ रखा है #शर्माजी के शब्द

By प्रवीन शर्मा
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